Thursday, January 19, 2012

बोटातला स्पर्श

बोटातला स्पर्श 
हर्ष अंगोपांगी 
नको तेही सांगी.....

सांगताना थोडा 
डोळ्यांना थरारा
वाटा सैराभैरा.....

सैरभैर साऱ्या  
समुद्राच्या लाटा 
आभाळाच्या काठा.....

काठावरी गर्द 
पेटलेला जाळ
चांदणे नितळ.....

: पानझड : ना धों महानोर.

Monday, January 16, 2012

तुझ्या वाटेला ओले डोळे


तुझ्या वाटेला ओले डोळे 
सुकून गेले  पाणमळे 

सजणासाठी सजून कोणी 
गाते पक्षिणी 
गीत निळे 
सुकून गेले पाणमळे 

राहू मैनेचे पंख पंखात 
हिरव्या झाडीत 
मनचळे.....
सुकून गेले पाणमळे 

जुन्या झाडाला हालता झुला 
ओला गलबला 
तुझ्यामुळे.....
सुकून गेले पाणमळे 

तुझ्या वाटेला ओले डोळे 
सुकून गेले  पाणमळे 

: पानझड 
: ना धों  महानोर

इथे झाडत निजलेल्या

इथे झाडत निजलेल्या 
पाखरा नाव न गाव 
निरागस पावलांसाठी 
नियतीचा पांगळा डाव.....

गलबला काळजामधला 
कहाणी चिंब भिजलेली 
कुठे देऊळ नसताना 
प्रार्थना दाटून आली ......

:पानझड : ना धों  महानोर


Monday, January 9, 2012

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफिला साथ और सफर तन्हा

अपने साये से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस कदर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर न जाने गए किधर तन्हा

Sunday, January 8, 2012

फराज


तुझे फुरसत हि नही मिली पढने कि फराज 
हम तेरे शेहेर में बिकते रहे किताबोन्की तरह

मुहब्बत


औरभी दुख है जमानेमे मुहब्बत के सिवा 
मैने तुमसेही नही सबसे मुहब्बत कि है 

फराज


उसने मुझे छोड दिया तो क्या हुवा फराज 
मैने भी तो छोडा था सारा जहा उसके लिये 

फराज


तुझे भूलने कि कोशिश करुंगा मै फराज 
हो सके तो तुम भी मुझे याद न आना

तू किसी और के लिये होगा समुंदरे इश्क


तू किसी और के लिये होगा समुंदरे इश्क 
हम तो रोज तेरे साहिल से प्यासे गुजर जाते है 

आसान नही आबाद करना घर मुहब्बत का


आसान नही आबाद करना घर मुहब्बत का 
ये उनका काम है जो जिंदगी बरबाद करते है 

आंख में खामोशी, लबोन्पे सवाल ,रुख्पे सादगी

आंख में खामोशी, लबोन्पे सवाल ,रुख्पे सादगी 
कैसे कैसे रंग है इस तस्वीर मै 


फराज

शायद तू कभी प्यासा मेरी तरफ लौट आये फराज 
आखोंमे लिये फिरता हुं दर्या तेरी खातीर 

फराज

भला हाथोंकी लकीरेभी कही मिटती है फराज 
कितना पागल है मेरा नाम मिटानेवाला 

फराज

वो रोज देखता है डूबते हुवे सुरज को फराज 
काश मै भी किसी शाम का मंजर होता !!!!

फराज

सुना है जिंदगी इम्तिहान लेती है फराज 
पर यहा तो इम्तीहांने जिंदगी ले ली 

फराज

मिली जो सजा मुझे वो किसी खतापे  न थी फराज 
मुझपे जुर्म जो साबित हुवा  वो वफा का था  
 

फराज


उन्गलीया तुट गई पथ्थर तराशते तराशते फराज 
और जब बनी सुरत-ए -यार तो खरीतदार आ गये 

फराज


इन बारीशोन्से दोस्ती अच्छी नही फराज 
कच्चा मकान है तेरा कुछ युं खयाल कर  

फराज

 अब निंदसे कहो हमसे सुलाह करले फराज 
वो दूर चला गया है जिस के लिये हम जगा करते थे 

फराज

मै उसका हुं, ये राज तू जो जान गया है फराज 
वो किसका है? ये सवाल मुझे सुनाई  नही  देता!!! 

Tuesday, January 3, 2012

मोमीन

नारसाई से दम रुके तो रुके
मैं किसी से ख़फा नहीं होता
If lack of access kills me, let it
I don't (ever) take offence at anyone



:मोमीन 

मोमीन

बे-वफ़ा कहने की शिकायत है
तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता



:मोमीन 

मीर


बाद मरने के मेरी कब्र पे आया वो मीर
याद आई मेरे ईसा को दवा मेरे बाद

After my death she came to my grave, O Meer
My Jesus remembered (my) cure, after me!

मुह तका ही करे है जिस तिस का

मुह तका ही करे है जिस तिस का 
हैरती है यह आइना है किस का 

तासीर बच के संग-ए-हवादिस से आये क्या

तासीर बच के संग-ए-हवादिस से आये क्या 
मेरी दुआ भी ठोकरें खाती है राह में