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Showing posts from December, 2019

जीव गेला तरी

जीव गेला तरी
प्राण देऊ नये 
आणि प्राणांसवें ..... मिलनाशा 

गळे पान पान 
जरी तुटे देठ 
परंतु ती भेट..... न टळावी 

ऐसें जी घडावें 
एकदा मीलन 
मिठीमध्यें प्राण ..... मावळेल 

तेव्हा प्राणासवें 
जा घेऊनी खूळ 
ना तरी हा छळ ..... संपे कैवा 

 : शिरीष पै

मिली हवाओं में उड़नें की वो सज़ा यारो

मिलीहवाओंमेंउड़नेंकीवोसज़ायारो
किमैंज़मीनकेरिश्तोंसेकटगयायारो वोबे-ख़यालमुसाफ़िरमैंरास्तायारो
कहाँथाबसमेंमेरेउसकोरोकनायारो मिरेक़लमपेज़मानेकीगर्दऐसीथी
किअपनेबारेमेंकुछभीनलिखसकायारो तमामशहरहीजिसकीतलाशमेंगुमथा
मैंउसकेघरकापताकिससेपूछतायारो जोबे-शुमारदिलोंकीनज़र