Tuesday, March 3, 2020

ध्यास

चांदण्यांचा झोत       झरे नभातून 
माझ्या मनातून       ध्यास तुझा. 

निर्झराचा नाद       घुमे पहाडांत 
माझ्या अन्तरात       हाक तुला. 

जुन्या देवालयात       उजळते वात 
माझ्या जिवनात       प्रीति तुझी. 

निळ्या आभाळात       पाखरांचे थवे 
वेडी माया धावे      तुझ्याकडे. 

निशी स्मशानांत       रात्रींचर रडे 
उरी धडधडे       तुझ्यासाठी. 

: ध्यास 
: विशाखा 
: कुसुमाग्रज 

No comments:

Post a Comment