Thursday, January 18, 2018

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा,
दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा
बुझ गई आस, छुप गया तारा,
थरथराता रहा धुआँ तन्हा
ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं,
जिस्म तन्हा है और जाँ तन्हा
हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी,
दोनों चलते रहें कहाँ तन्हा
जलती-बुझती-सी रोशनी के परे,
सिमटा-सिमटा-सा एक मकाँ तन्हा
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा।

Tuesday, January 2, 2018

पायाखाली वाळू

पायाखाली वाळू 
जाता तुडवित 
ढासळले चित्त 
कणकण 

ओहोटीच्या पार 
लावता मी ध्यान 
अचानक ऊन 
मावळले 

अशी भडकावी 
काळजात आग 
तैसा रंग राग 
चोहीकडे 

अपुऱ्या डोळ्यात 
न मावे सोहळा 
पाहिजे फाटला 
उर आतां. 

: पायाखाली वाळू 
: शिरीष पै